इक कश तो आह भर
पल पल में बहार
इक पल में ही
बारिश की फुहार
वक्त बेवक़्त बहती
रूमानी पुरवाइयाँ
घड़ी भर गुनगुनाती
धूप लम्हां लम्हां
ख्वाहिशों के बादल
ओढ़े शामों सहर
कही अनकही छांव की
करवट हर पहर
रुबेरु हो इक दफ़ा
तेरा फ़लसफ़ा
ये शहर है जो दिलक़श
इक कश तो आह भर
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