कही कुछ अनकही सी धुप
चुभने लगी है ये जो सर्द नूर
फिसलता जिंदगी का जैसे कोई सुर
मन में बहती ये बेताबी की कश्तियाँ
आँखों में समाती जुनून की मस्तियाँ
उड़ते आज़ाद बेफिक्रे पंछियो सा मन
झिलमिलाते उमंगों सा जो पागलपन
खिलखिलाते आवाज़ों का चिलमन
हवाओं के झोकों सी अब ये जिंदगी
मचलती दो पल झरोखे से जिंदगी
चुभने लगी है ये जो सर्द नूर
फिसलता जिंदगी का जैसे कोई सुर
मन में बहती ये बेताबी की कश्तियाँ
आँखों में समाती जुनून की मस्तियाँ
उड़ते आज़ाद बेफिक्रे पंछियो सा मन
झिलमिलाते उमंगों सा जो पागलपन
खिलखिलाते आवाज़ों का चिलमन
हवाओं के झोकों सी अब ये जिंदगी
मचलती दो पल झरोखे से जिंदगी
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