Tuesday, 7 February 2023
Thursday, 2 September 2021
50m Rifle 3 Positions
Final में 40 shots के बाद 6th positions पे चलने के बाद अंतिम 5 shots में सीधा Bronze पे निशाना साधा है
10m Air Rifle Standing
Qualification Round में 7th Place पे qualify करने के बाद Final में सीधा Golden shot.
Ek जुनून
ज़िन्दगी में कुछ पल आप अकेले होते है
कुछ पल बेफिक्र बेसब्र उड़ती "ज़िंदगियों" के बीच
मगर ये "ज़िंदगिया" किताब के पन्नों तक नहीं सिमटती
ये तो आपकी ज़िन्दगी जीने को मुक्कमल करती है
CLASS इक थिएटर है
जहाँ बेफिक्र उन्मुक्त कुछ ख्याल कुछ अलसाये से सवाल
कुछ कारिस्तानी के लिफाफे जब खुलते है तो यकीन मानिये
सिर्फ आप ज़िन्दगी हँसते है
मैं अपनी ज़िन्दगी के हर रोज़ 6 घंटे इस मंच को देता हूँ
जहाँ 5 घंटे सिर्फ मैं हँसता हूँ क्यों की कल्पनाओ के अंत नहीं होते
सिर्फ और सिर्फ रोमांच से भरपूर अनुभव होते है
मैंने अपने सफर की शुरुआत Maths Teacher से की थे
और आज ये सफर History Teacher तक चल रहा है
क्यों की हर एक Student के पीछे छिपा एक Teacher होता है
जो आपको सिखने पे मजबूर कर देता है
डर इक ज़िन्दगी है जिसका सामना डर पे खड़े होके ही किया जा सकता है
जब मैंने पढ़ाना शुरू किया था तब मेरे अंदर भी एक डर हावी था "हिंदी मीडियम"
एक दिन DPS के बच्चे आये और तब से डर सिर्फ दिमाग के बाहरी हिस्से में आ गया
एक डर जिसकी वजह से
मैंने 12th के Exam में Maths से डर डर के 100 में से 100 नंबर लाये।
"एक दिन आप भी डर से जीत सकते है क्यों की डर एक ज़िन्दगी है जिसे हरहाल में आपको जीना है."
Sunday, 18 April 2021
Tuesday, 30 March 2021
आप सब कुछ गँवा सकते है
लेकिन अपने सपने नहीं.......
जिस दिन आप
आज़ाद परिंदों की तरह खुले आसमां में
ख्वाबों के हर तिनके बुनना सिख जाये
ज़िन्दगी पे ज़िन्दगी जैसे हर पल हर लम्हे
समंदर की लहर, लहर सी यूँ बस उफनती जाये
कल क्या हो, किसको फ़िक्र है
ये लम्हें आज कुछ सुकून सें हैं
आशियाने में दबे पाँव
इतमीनान सी कश्मकश है
बागी हवाओ में भी
जाने क्यों वक्त मुझे बेफिक्र लगता हैं
कोइ तो है इस मकां में
हर पंखो को परवाज मिल जाता है
सैलाब जैसे खुद वे खुद जज्ब हो जाता है
वो लाफानी वो ही उम्मीद
Saturday, 5 December 2020
Tuesday, 29 September 2020
Thursday, 17 September 2020
ये मन कभी सँभलता ही नहीं
सांसें अब मेरी बेकाबू सी रही
जानें कैसा खुमार
है दिल पे चढ़ा
खानाबदोश राहों पे ही
क्यों ये चल पड़ा
ये मंज़र मेरे रंग सा है
बेफिक्र उड़ता फिरता मैं
ये जहाँ सारा मलंग सा है
थोड़ी सी धुप है छाँव है
खुली दिशाएं और
मंज़िल अनजान कहीं
सफर में छिपी कैसी ये धुन है
फिकरे सारी कहाँ गुम है
बेगानी राहों पे संग ये परछाइयाँ
मिलों दूर, दूर तक बस मेरी बेताबियाँ
थोड़ी सी है ज़िन्दगी ये बेरुखी क्यों ?
देखो मौसम ने ली है करवटे
रूखे सूखे रास्तों पे
गुदगुदा रही ये बेचैन हवाएं
हर तरफ हर लम्हों में आवारगी
हम चले है ये राहें अनकही
e man kabhi sambhalta hi nahi
Saanse ab meri Bekabu si rahi
Jaane kaisa khumar hai
dil pe chadha
Khanabadosh raho pe hi
Kyu ye chal pada
Ye manzar mere rang sa hai
Befikar Udta chadta parinda
Ye jahan saara malang sa hai
Ye savera hai naya
Manmauji lfange
Safar me chhipi kaisi ye dhun hai
Fikre saari kahan gum hai
Begani raho pe dhundhti bechaniya
Milo door Door tak bas meri betabiyan
Rubooru ye shahar ye gaon
Ye banshide ye gharonde
Chhode hai saare sapne
Tumhare ab hai Hawale