Sunday, 14 June 2020

 फिर से मैं छिछोरा मुस्कुराउगां

 हंसता है कोई चेहरा
 किसी ख्यालो पे ठहरा
 बातों बातों पे है
 बेचैन थोड़ा बेताब
 उथले समंदर पे ढूंढता
 मध्यम पडे़ सूरज से मांगता
 हल्की सी रोशनी का सैलाब

 धुंधली यादे है सिरहाने
 खोये जिंदगी के ठिकाने
 अतीत के छलावे तले
 जाने किस ओर चला जाउगां

 अपने मन का हौसला बन
 उठती सिसकियों को दिखाउगां
 फिर सपनो का बिछौना डाल
 अपनी जंग पे खुद को हराउगां
 राहों पे फिक्रे उड़ा हर लम्हें पकड
 फिर से मैं छिछोरा मुस्कुराउगां








Thursday, 11 June 2020

 ये फ़ितूरिया ज़िंदगी जी आया 

 कुछ देर ठहर गया
 ज़िंदगी पे सेता आया

 बाकी ख्वाहिशों की मर्ज़ी
 रास्तों पे लम्हे हैरत जाये
 या फिर लम्हों में रास्ते कट जाये

 बदलते पल पल बेतरतीब हालत में
 हिचकोले भरते जो मनमोजी ख्यालात थे

 मेरी ज़िंदगी तो बस लबालब जी आयी
 मिलती हैरानियों से उमर तक सीख आयी

 ख्वाबों के समंदर पे खुलते हर वो सवेरे
 आवारा हसरतो से मिलती हर वो शामें

 रंग रंग उड़ते नज़ारे पकड़ती ये निगाहे
 जैसे ज़िंदगी पे ज़िंदगी खुल के बरस आयी

 खाके में खुद का ना ढाल पाया
 इस बेढंगे पे क्या मलाल रखूं

 कुल्हड़ पे गरमाती चाय के कश भर
 ये फ़ितूरिया ज़िंदगी जी आया








Wednesday, 10 June 2020


 ये रास्ते

 दबे छिपे नज़ारे
 खुलते निगाहों में
 हमको है जगाते
 हमको है बताते

 मन में है कोई
 क्यों तू निर्मोही
 फेंक यही

 देख जरा
 रास्तो पे है क्या
 क्या से क्या हो रहा

 थोड़ा है रास्ता
 थोड़ा ही सही
 रख ले मेरे से
 कुछ तो वास्ता

 भीनी भीनी खुशबुएँ
 आती मंज़िल की
 देखो राहो पे है बसी कही

 अब तो खोल अपनी बेताबियां
 आ लग जा गले
 हो थोड़ी तो अपनी भी यारियां

 थोड़े है बागी
 थोड़े यारी से ये रास्ते
 पर ले जायेंगे तुमको
 तुम्हारे सपनो की दुनिया 

Sunday, 7 June 2020

खानाबदोशी हवा दे

 खानाबदोशी, हवा दे
 रास्ता ये सबका सगा रे
 इमारतों में दम घोटता ओ फकीरा
 अपने को ही तू दगा दे

 लापता दिल कहीं ऐसे बीहड़ में
 जंगल मार छान छान दबोच ले
 जिंदगी है मौत भी यहाँ
 मारेगी तो इक दफा ही यहाँ

 कुछ हो पाने की जिद सीने पे सीने दे
 ख्वाहिशों को खुल के अरराने दे
 कर कोशिश कहीं सीनाजोरी हो बार बार
 मंज़िल हो सूरज भी, हो आर पार
 ख्वाबों के दो पंख ही सही लगा दे
 धुन पे बहका बस उड़ चला जावे

 ओ फकीरा खानाबदोशी, हवा दे
 रास्ता ये सबका सगा रे
 घुमन्तु दिल कही जगा दे
 जिया बंजारे के संग लगा रे
खानाबदोशी, राहे लापता

खानाबदोशी, राहे लापता
दिलक़श नज़ारे, भूले सारे फ़साने
बेकस दुनिया, ये हमनशीं ठिकाने
दो राह ये रास्ता
कोई थामे, छोड़ दे क्या वास्ता
जिद पे दिल, हर धड़कने
चला अपने ही रास्ते ये दीवाने

ये जमाना बुरा, जाये धुआँ धुआँ
बनके बादल, थाम के दिल की अर्ज़ियाँ
बरस जा यहीं, हो अब चाही मनमर्ज़ियाँ
जम के जी ले फिजा़, ख्वाब रुआँ रुआँ

तेरे मेरे ख्यालो से आबाद
ख्वाबो का शहर
हवाओ पे हक जो मुसाफिर बंजारे
मैं भी ना जानूँ तू भी ना जाने
जाने ले जाये कहाँ ये डगर
ना मुझको खबर
ना तुझको पता
सफर भी ओ बेखबर

मिलेगी ना दोबारा ये ज़िंदगी

फ़िज़ाओं में बह रही है ये दिल्लगी
गुमशुदगी जो थी, पीछे रह गयी
निकले उनसे आगे हम
नए नए रास्ते चुन के
खो गयी, फिकरे जो थी
नए नए सपने बुन के
उड़ गयी, बेफिकरे सी
ये ज़िन्दगी .........

बिखरे थे जो पर, समेटे है हम
बेपरवाह परवाज हो गए है ये
की अब जो भी हो सो हो
झिलमिल खोई सोई जो मंजिल
लगता है अब है पायेगे हम

हवाओं से कह रही ये आवारगी
ना रहे अब कोई दगदगी
अब तो बस ले चले कहीं
हर पल मचलती झूम के चलती
फिर मिलेगी ना दोबारा ये ज़िंदगी
आवारा से सफर 

वादियों में बहती हुई धुन ये इशारे दे
आवारा से सफर को कही किनारे दे

ढेढे-मेढ़े रस्ते है
कंधो पे बोझिल बस्ते है
तू है यहाँ, साथ भी ये जहां
तो गिरा दे सैलाब यहां
थोड़ा बेताब हो जा जरा
ख्वाबो को यही ठिकाने दे

हो जाये हम यही लापता
ना रहे अता पता किसी का हमे
खो जाये दिल कुछ पल कहीं
यही कहे हर पल इस सफर का हमे

कागज के परदे है
दुबके मजहबी बेतुके है
कुछ गलत भी हो जाये तो क्या हर्ज़
हो जा जरा खुदगर्ज़
बेधड़क तराने, इस तरह से चले
होश रहे ना हमे कही ये जहां
नशे में शोर गूंजे यहां से वहां