Wednesday, 10 June 2020


 ये रास्ते

 दबे छिपे नज़ारे
 खुलते निगाहों में
 हमको है जगाते
 हमको है बताते

 मन में है कोई
 क्यों तू निर्मोही
 फेंक यही

 देख जरा
 रास्तो पे है क्या
 क्या से क्या हो रहा

 थोड़ा है रास्ता
 थोड़ा ही सही
 रख ले मेरे से
 कुछ तो वास्ता

 भीनी भीनी खुशबुएँ
 आती मंज़िल की
 देखो राहो पे है बसी कही

 अब तो खोल अपनी बेताबियां
 आ लग जा गले
 हो थोड़ी तो अपनी भी यारियां

 थोड़े है बागी
 थोड़े यारी से ये रास्ते
 पर ले जायेंगे तुमको
 तुम्हारे सपनो की दुनिया 

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