ये रास्ते
दबे छिपे नज़ारे
खुलते निगाहों में
हमको है जगाते
हमको है बताते
मन में है कोई
क्यों तू निर्मोही
फेंक यही
देख जरा
रास्तो पे है क्या
क्या से क्या हो रहा
थोड़ा है रास्ता
थोड़ा ही सही
रख ले मेरे से
कुछ तो वास्ता
भीनी भीनी खुशबुएँ
आती मंज़िल की
देखो राहो पे है बसी कही
अब तो खोल अपनी बेताबियां
आ लग जा गले
हो थोड़ी तो अपनी भी यारियां
थोड़े है बागी
थोड़े यारी से ये रास्ते
पर ले जायेंगे तुमको
तुम्हारे सपनो की दुनिया
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