Monday, 27 February 2017

मैं ज़िन्दगी की तलाश में हूँ 
पुराने सहमे से हताश में हूँ 
नए नए अवसर की आस में हूँ 
मगर छूटे डगर के पास ही हूँ 

मंज़िल के रास्ते मिलने की आशा में हूँ 
लक्ष्य तक ना पहुँचने की निराशा में हूँ 
बाधाओं के ख़त्म होने का इंतजार है   
मगर हर जगह रास्तों का इंतशार है 

मंज़र के सच ना होने का डर है 
मगर संभलने के लिए भी दर है 
अपने पास तरकीबें बहुत सारी है 
पर सफर में सब की सब जारी है

टूट चुका हूँ अंदर से अब मैं 
छूट चुके है अब सब अपने 
फिर भी ना जाने क्यों 
मैं ज़िन्दगी की तलाश में हूँ 

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