Saturday, 6 June 2020

 ज़िंदगी है कश लगा
 उलझी हुई, फ़िक्रे सिरहाने रख
 कश्मकश पे बड़ी ज़िद्दी है ये ज़िंदगी
 मुँह फेर हंस के चिढ़ा दे
 दो कश भर धुएँ में उडा दे
 है क्या ये ज़िंदगी !

 दो दिन की तो है ये ज़िन्दगी
 लगा दे रंग रंग बेताबियों की क्यारियां
 ठंड पायेगी रास्तों पे है थोड़ी तो यारियां
 बुलबुलों पे उम्र, उमर बस हसती जाए

 इक आध पल का ही ये रंज है ओ रांझने
 किथे जायेगी तेरी हीर मिट्टी पा
 सुलगती, ख्वाहिशों के चूल्हे पे
 पड़ी राख उडाता जा
 आँखों में बिलखते बहाने ही सही
 ज़िंदगी है कश लगा



































 छूटी है ख्वाहिशें किनारों पे,
 पकड़ ले दोस्त
 नन्हें है पल सीने दे
 आँख मिच के जरा जीने दे
 यादों के दो पंख लगा के
 धुन पे बहका बस उड़ चला जावे रे
Bairaagi  ❤
स्टेशन - Himachal Pradesh

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