Saturday, 6 June 2020

 पहाड़ों के सुहाने कैनवास 

 ओह तुम्हें Drwaing बनानी है
 चलो मैं ले जाता हूँ तुम्हे
 इस छलावे से कही दूर
 दूर इन मटमैली झाड़ियों के पार
 वहां उन सुनहरी पहाड़ियों के उपर

 जहां तुम अलसायी शाम में बैठ के
 अपने ख्वाबो के रंग उड़ेलना
 चीड़ के पत्तो की बिछी चादर में से
 अपनी ख्वाहिश से कुछ पत्ते चुनना
 और उन्हें अपने ख्यालों के Canvas में ढालना

 ज़िद पे अड़के
 कुछ रंग उड़ती गुलाबी चिरियों से लेना
 कुछ रंग नीले आसमां से चुराना
 तश्तरी पे पड़े रूखे सूखे रंगो को
 घास पर जमी ओस से भिगोना

 हर पल जो निगाहें तुम्हारी देखे
 आँख मिच के बस उन्हें बना देना
 और फिर इन रंग बिरंगी क्यारियों को
 उड़ा देना खड़े किसी खाई के किनारे

 हम
 फिर किसी Drwaning के बहाने
 फिर किसी नयी दिशा में चलेंगे
 फिर किसी सलोने पहाड़ो से मिलेंगे
 फिर किसी नए सपनो के साथ















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