पहाड़ों के सुहाने कैनवास
ओह तुम्हें Drwaing बनानी है
चलो मैं ले जाता हूँ तुम्हे
इस छलावे से कही दूर
दूर इन मटमैली झाड़ियों के पार
वहां उन सुनहरी पहाड़ियों के उपर
जहां तुम अलसायी शाम में बैठ के
अपने ख्वाबो के रंग उड़ेलना
चीड़ के पत्तो की बिछी चादर में से
अपनी ख्वाहिश से कुछ पत्ते चुनना
और उन्हें अपने ख्यालों के Canvas में ढालना
ज़िद पे अड़के
कुछ रंग उड़ती गुलाबी चिरियों से लेना
कुछ रंग नीले आसमां से चुराना
तश्तरी पे पड़े रूखे सूखे रंगो को
घास पर जमी ओस से भिगोना
हर पल जो निगाहें तुम्हारी देखे
आँख मिच के बस उन्हें बना देना
और फिर इन रंग बिरंगी क्यारियों को
उड़ा देना खड़े किसी खाई के किनारे
हम
फिर किसी Drwaning के बहाने
फिर किसी नयी दिशा में चलेंगे
फिर किसी सलोने पहाड़ो से मिलेंगे
फिर किसी नए सपनो के साथ
ओह तुम्हें Drwaing बनानी है
चलो मैं ले जाता हूँ तुम्हे
इस छलावे से कही दूर
दूर इन मटमैली झाड़ियों के पार
वहां उन सुनहरी पहाड़ियों के उपर
जहां तुम अलसायी शाम में बैठ के
अपने ख्वाबो के रंग उड़ेलना
चीड़ के पत्तो की बिछी चादर में से
अपनी ख्वाहिश से कुछ पत्ते चुनना
और उन्हें अपने ख्यालों के Canvas में ढालना
ज़िद पे अड़के
कुछ रंग उड़ती गुलाबी चिरियों से लेना
कुछ रंग नीले आसमां से चुराना
तश्तरी पे पड़े रूखे सूखे रंगो को
घास पर जमी ओस से भिगोना
हर पल जो निगाहें तुम्हारी देखे
आँख मिच के बस उन्हें बना देना
और फिर इन रंग बिरंगी क्यारियों को
उड़ा देना खड़े किसी खाई के किनारे
हम
फिर किसी Drwaning के बहाने
फिर किसी नयी दिशा में चलेंगे
फिर किसी सलोने पहाड़ो से मिलेंगे
फिर किसी नए सपनो के साथ
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